जिस पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान ने बंदी बनाया, उनका परिवार क्या बोला : जिनेवा समझौते के तहत विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने को मजबूर होगा पाक

विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में हैं.

इंडिया ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की. जैश ए मोहम्मद के आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया. उसके एक दिन बाद अब पाकिस्तान की तरफ से भी जवाब देने की कोशिश हो रही है. 27 फरवरी को पाकिस्तानी एयर फोर्स के विमान भारतीय सीमा में घुसे और उन्हे खदेड़ने के लिए इंडियन एयर फोर्स के विमान पीछे तक गए. इसी कोशिश में इंडियन एयर फोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन के पाकिस्तानी सीमा में चले जाने की खबरे भी आईं.

इधर हमारे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मीडिया के सामने आकर कबूला कि हमारा एक पायलट अभी मिसिंग है. प्रवक्ता ने नाम नहीं लिया, मगर उधर पाकिस्तान ने तो पूरा वीडियो ही डालकर अभिनंदन के पकड़े जाने की बात कह दी.जो भी हो इंडियन एयर फोर्स का ये जवान पाकिस्तान के कब्जे में है और इधर इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि वो हमारी ही एयर फोर्स का जवान है. उधर अभिनंदन के परिवार तक मीडिया पहुंच गया. साउथ के चर्चित अखबार द हिंदू के एक रिपोर्टर रोहित टीके ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि उनकी अभिनंदन के परिवार से बात हुई है.

चेन्नई में उनके परिवार ने मांग की है कि बेटे को जल्द से जल्द वापस लाया जाए.रोहित ने ये भी कहा है कि उनकी अभिनंदन के अंकल से बात हुई है और उन्होंने कहा है कि पूरा परिवार टीवी पर अभिनंदन के विजुअल्स देखकर दुखी है और वो सरकार से उसे वापस सुरक्षित लाने की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तान ने भी कहा है कि अभिनंदन के साथ कोई भी बदसलूकी नहीं की जाएगी. जेनेवा कनवेंशन के मुताबिक किसी भी प्रिजनर ऑफ वॉर के साथ बदसलूकी नहीं की जा सकती है.

पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को गिरफ्तार करने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि युद्धबंदियों पर जिनेवा संधि के नियम लागू होते हैं। पाकिस्तान को भारतीय पायलट के साथ मानवीय व्यवहार करना होगा। जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता। उन्हें लेकर जनता में उत्सुकता भी पैदा नहीं की जा सकती। पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है। युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाता है। जिनेवा संधि का आशय दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 1949 में तैयार की गई संधियों और नियमों से है। इसका उद्देश्य युद्ध के समय मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना था। हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है।

इस बीच, वायुसेना के पूर्व अधिकारियों ने विंग कमांडर की सकुशल वापसी की उम्मीद जताई है। पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है कि जंग की स्थिति में यह एक कोलैटरल डैमेज है और उम्मीद है कि पाकिस्तान युद्धबंदी नियम के उल्लंघन की हिमाकत नहीं करेगा। राहा ने कहा कि हालांकि हमारा पड़ोसी देश हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह इस समय कोई मूर्खता करेगा। इस समय पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है। अगर पाक कुछ भी करता है तो उसे ही परेशानी उठानी पड़ेगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई।

ऐसे में उन्हें पैराशूट की सहायता से विमान छोड़ कर उतरना पड़ा। इस दौरान विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद स्कर्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतरे। जहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने हिरासत में लिया।

इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के चलते पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। घटना के एक सप्ताह बाद तीन जून को वे भारत वापस लौटे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में जाने का यह दूसरा अवसर था।

Author: admin

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